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National Institute of Food Technology Entrepreneurship and Management, Kundli The official literary society

Shayari

इस घनी घटा को मै क्या नाम दूं

इस घनी घटा को मै क्या नाम दूं,कोई बरसात,कोई कोहरा, तो कोई महफ़िल-ए-इश्क़ कहता है।

तेरी इस हया को मै क्या नाम दूं,कोई अदा, कोई कुर्बत, तो कोई सरताज-ए-इश्क़ कहता है।

इस कयामत को मै क्या नाम दूं,कोई धड़क, कोई शिद्दत, तो कोई सज़ा-ए-इश्क़ कहता है।

इस मौत को मै क्या नाम दूं,कोई कुबूलियत, कोई मकबूल, तो कोई इश्क़ कहता है।

Madhav Menon

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