आपके अल्फाज़ मेरे दिल पर नक्श हैं, गुलाबों के बागों के बीच,तलाश करोगे तो पाओगे मुझे धूप के समंदर के नीचे, नसर और शायरी में दफ़न ।।आपके तसव्वुर को महफूज़ कर रखा है मैंने, कागज़ की कश्तियों में,जो मेरे जिस्म के दरिया में चलतीं हैं, घुरूब ए आफ़ताब के वक्त,और पानी माया सोने की तरह लगता है।।
जाने कब होगी मुलाक़ात हमारी, जब भर दूंगी आपके दिल के हिस्से को,गुलदस्तों और सोने की कढ़ाई से, और बना लूंगी उसे अपना लिबाज़।।आपकी तस्वीर सजाई है, धनक के रंगों से,जिसमे आपकी खुशी झांक रही है, मोहब्बत के पर्दों में से।।
याद है, जब अनार के करमज़ी बीज खाए थे हमने,उस शाम, जब सूरज हमारी जल्द पर कंदा हुआ था,नज़्मों और ग़ज़लों की शक्ल में।।
जल्द मिलना,आपके हिज्र में मुरझाया एक फूल,अज़रा
खतों का संदूक: अज़रा और उसका बागीचा: Amulya



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